गुरुकुल ५

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Sunday, 9 June 2013

नक्सली / वनवासी

मैं नक्सली हूँ?  या मैं ही वनवासी?  यदि नक्सली ही बन गया तो?
मैं नक्सली हूँ?
या मैं ही वनवासी?

बहुत मुश्किल है
वनवासी  के झुरमुट में
नक्सली ढूढ़ना

सबने पहन रखे हैं
एक ही मुखौटे?

वनवासी के बीच

नक्सली

वनवासी  ही
खोजना जानता है

और हर बार
खोज लेता है
गड़रिया बन वनवासी

या फिर खोज निकालता है
घात लगाकर
भेड़िया बन नक्सली
या रक्षक बन
मेरे अपने
जो हैं मेरे अपने?

जन्म से मैं वनवासी
नक्सली हूँ नहीं

आज भी वनवासी रहकर ही
नक्सलियों में
न ही बन पाया वनवासी

और दोहरी प्रताड़ना झेलकर भी
नक्सली ही कहाँ बन पाया

नहीं रहा मैं वनवासी ?

यदि
नक्सली ही बन गया तो?

26 मई 2013
समर्पित
दरभा घाटी नक्सली हमले में
घायल और स्वर्गीय लोगों को
और चिंता में वनवासियों के

14 comments:

  1. व्‍यवस्‍था पर बड़ा प्रश्‍नचिह्न.

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  2. चिंता जायज है. अति हमारी तरफ से भी हुई है. सुंदर सामायिक प्रस्तुति.

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  3. बहुत सुन्दर भावात्मक प्रस्तुति
    latest post: प्रेम- पहेली
    LATEST POST जन्म ,मृत्यु और मोक्ष !

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  4. बहुत उम्दा सामायिक प्रस्तुति,,,

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  5. नक्सली / वनवासी बहुत मुश्किल है परिभाषित करना ...चिंता जायज़ है, हिंसा समाधान नहीं...

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  6. भेद करना आसान होता तो समस्‍या कब की समाप्‍त हो चुकी होती।

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  7. कारण चाहे जो भी हो पर अपने ही घर में लूट-पाट करना और लाशें बिछाना,हर स्थिति में निंदनीय है । अच्छा होता यदि वे अपने साहस एवम् बल का इस्तेमाल देश-हित में करते ।

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  8. प्रभावी रचना .. समस्या के मूल को पहचानने का प्रयास ...
    पर सरकार पहले भी चुप अब भी चुप ...

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  9. मेरी समझ में समस्या को राजनैतिक चश्मे से ही देखने के और सलवा जुडूम जैसे प्रयोगों से समझने और हल करने के प्रयास अब तक हुए हैं .आवश्यकता इसे सामाजिक,आर्थिक और सांस्कृतिक परिदृश्य के सन्दर्भों से हल करने की है

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  10. बहुत ही सार्थक रचना। धन्यवाद।

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  11. सामयिक गहन रचना!
    ढ़
    --
    थर्टीन ट्रैवल स्टोरीज़!!!

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  12. जन्म से मैं वनवासी
    नक्सली हूँ नहीं...vanwasi ka dard kaun samajhta hai bechare pis jaate hain .....

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  13. सामायिक प्रस्तुति ..व्यवस्था पर सवाल उठती हुई.

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