गुरुकुल ५

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Wednesday, 12 March 2014

पद्म श्री अनुज शर्मा



पारिवारिक क्षणों में श्री राहुल कुमार सिंह के साथ पद्म श्री अनुज शर्मा जी 
ये कह पाना कठिन कि मेहमान कौन और मेजबान कौन
विनम्रता, सहनशीलता, ज्ञान, विवेक, धैर्य, अनुशासन, हमने भी सीखा संगत में
 अकलतरा पैतृक गृह ग्राम में पंडित जी, भाई, बहनों और भतीजों संग राहुल सिंह
सदा धीरज का दामन थामे चाहे समय कितना भी अनुकूल या प्रतिकूल हो सम भाव
संदेशों का आदान प्रदान करते अपूर्व सिंह घर के प्रांगण में धीरज का दामन थामे

छत्तीसगढ़ के चार महत्वपूर्ण स्तम्भ पार्श्व में मैकल श्रंखला का अकेला पर्वत दल्हा
पद्म श्री अनुज शर्मा, श्री ललित शर्मा {ब्लॉगर } और श्री अशोक तिवारी जी { पुरातत्व विभाग }
अरे आदरणीय आप कहाँ खो गये ये हमें देखने लगे परदे के पीछे चित्रकार हम हैं जी
बस हमने TAB 3 से कैद कर लिया अपने सपने को जो आज हक़ीक़त में आ गई
 एक सुख दुःख की  चर्चा जहां झलकता  और बहती स्नेह, आत्मीयता की  मीठी बयार सुनहरी धुप संग

 ये लुकाछिपी मैना का चित्र खीचते बखत कहीं उड़ न जाये ये अंदाज़ भी भा गया मन को
और खींच गया चित्र मैना संग लाल फूल सेमल के कटघरी प्रवास पर चलते चलते

प्रेम की इंतहा मैना और धुप ने अच्छे फोटो के लिए बैठने को कलाकार को पेड़ से बाँध दिया
ये समय लगा कैमरा, लाइट, साउंड और एक्शन का समय का चक्र घुम चला अनवरत

अनुज बाबू का प्रेम हमारे लिए भी छलका हम भी सराबोर हो गए और मर गए सादगी पर
क्या कहूं कुछ भी कम हैं ऐसे लोग लाखों में एक और सदियों में जन्म लेते हैं छत्तीसगढ़ में
पसंद भी तो श्री राहुल कुमार सिंह की हैं कइसे अनुज बाबू भला तुंही बतावा जी गल्ती कहें का जी

एक बार सोचने लगा छत्तीसगढ़ का पर्याय कौन निर्णय मेरे लिए कठिन आप अपनी जानो जी

कोटगढ़ का मिट्टी का किला और खटोला सरस्वती शिशु मंदिर के बच्चे रम गये नैसर्गिक कलाकार में
एक क्लास ले ली और जीवित उठे मया फ़िल्म के गीत और दृश्य शुरू हो गया सिलसिला गीतों का
कोटगढ़ के किला को कैमरे में  करते अनुज बाबू संग में कैद हो गये सदा के लिये
ब्लॉगर श्री ललित शर्मा जी और बड़े भैया श्री अशोक तिवारी जी जन्म जन्मों तक
भा गया राजेंद्र कुमार सिंह हायर सेकेंडरी स्कुल का विज्ञान प्रयोग शाला मगन हो गए
जीवों के सुरक्षित किये गये बोतलों में जीवंत हो उठे विद्यालय के अनमोल क्षण
विज्ञान प्रयोगशाला को मूर्त रूप देने में पूर्व प्राचार्य श्री रामचंद्र मिश्रा जी का मार्गदर्शन
अनुज बाबू आयें और और युवराज सिंह स्वागत में खड़ा न हो कैसे बनेगा मिल गया आशीर्वाद
कौन किसे कितना प्यार करता है बता पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हैं छत्तीसगढ़ में
ललित शर्मा { भाई जी } अकलतरा आयें और शानू को स्नेह न मिले मुछ वाले मामा जी
अकलतरा स्थित जिमखाना में ललित भाई और अनुज बाबू की उपस्थिति ने मन को मोह लिया 

राजेद्र कुमार सिंह सभा भवन में टंगे वैज्ञानिकों की उपलब्धियां और जीवन वृत्त को बाँचते
सराहना की ऐसे सुन्दर संयोजन की जिनसे लोग और विद्यार्थी प्रेरणा प्राप्त करेंगे
विदाई का समय हर्ष घर आने का और दुःख जल्द ही चले जाने का मेरी कुटिया को पवित्र किया
बड़े भैया अशोक तिवारी, ललित भाई और सदा मुस्कुराते पद्म श्री अनुज शर्मा जी ने
मेरा सौभाग्य इन आत्मीय जनों कि उपस्थिति मेरे घर

समर्पित श्री ललित शर्मा lalitdotcom के सर्जक को
आप सबका स्नेह और मार्गदर्शन सदा साथ रहा

१२ मार्च २०१४

Monday, 10 March 2014

रेल, सड़क निर्माण विभाग और नगर निगम


इंस्पायर अवार्ड विज्ञान प्रतियोगिता २०१३  २०१४
१५ जनवरी एवं १६ जनवरी २०१४  

 आदरणीय जिलाधीश महोदय शिक्षको और प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए
 मंचासीन जिलाशिक्षाधिकारी एवं विद्वान विज्ञान मार्ग दर्शक और अतिथिगण
 शिक्षक गण और बाल वैज्ञानिक
हम भी शामिल हो गए कुछ सीखने और मार्गदर्शन लेने

 कुमारी पूर्णिमा पू मा शा पाटियापाली करतला, कोरबा छ.ग. अपने मॉडल के साथ
 मॉडल को जिला स्तरीय सम्मान पर दिया गया स्थान 

 श्रीमति कुटार जी प्राचार्या हाई स्कुल कुसमुंडा कोरबा निरीक्षण में
 सर्वमंगला रेल पुल कोरबा का निचला दृश्य अवलोकनार्थ 
गेमन पुल का निचला भाग अवलोकन के लिये

प्रोजेक्ट का मूल उद्देश्य 

*जल संरक्षण और जल संवर्धन
** पर्यावरण संरक्षण
***प्राकृतिक श्रोत और मानव की  अन्योन्याश्रितता का अन्तर्सम्बन्ध
****  सूर्य और ओजोन पर्त का ज्ञान का विस्तार
*****  प्राकृतिक जल का दोहन
****** कार्बन साइकल को नियंत्रित करना
******* वनस्पति का जीवन में महत्व बतलाना
******** चाम्पा शहर को स्वच्छ जल कि पूर्ति करना
********* गेमन पुल पर यातायात को  सुगम बनाना
********** गेमन पुल पर यातायात का दबाव कम करना
*********** भारत वर्ष में पहली बार रेल, सड़क निर्माण विभाग और नगर निगम का सम्बन्ध
************ शहर को हरा भरा बनाना
*************  भारत के अलग अलग विभाग के पुलों का संरक्षण
**************  यातायात कि दृष्टि से मानव जीवन को सुरक्षित बनाना
*************** शहरी जीवन को भी ग्राम्य जीवन की भांति  खुशहाल बनाना
**************** शहर में वनस्पति की आपूर्ति करना

कोई संदेह नहीं कि रेल विभाग और अन्य विभाग विद्वान यंत्रियों से भरे पड़े हैं किन्तु सुधार की  गुंजाईश सदा बनी रहती है और दूसरे लोग उनसे बेहतर सोच सकते है 

सादर समर्पित आदरणीय सतीश सक्सेना जी को 
आप मेरे गीत ब्लॉग के सर्जक है 

Tuesday, 4 March 2014

गुरुकुल ४

विद्यालय मेरी कर्म भूमि
आपके मार्ग दर्शन की बाट जोहती




























आपका अपना रमाकांत सिंह

कोई आदर्श नहीं हम मगन हैं अपने बच्चों के साथ ३६५ दिन
गुरुकुल 

Saturday, 25 January 2014

तमाचा

जो तुम्हे काँटा बोये उसके लिये तुम फूल बिछा दो?

संत कौन हैं?
राजधर्म क्या है?
प्रजा धर्म का निर्वाह किसका?
धर्म निर्वहन एकांगी किस हद तक न्यायोचित

सब अपनी सीमा पर रहें?
कोई कलेश नहीं न कोई आहत होगा

२६ मार्च २००३ को मेरे पिता तुल्य बुजुर्ग को एक तमाचा जड़ दिया
कोई और नहीं रोज पैर छूनेवाला नाती
अपनी ज़िद मनवाने की खातिर
सागर ने सीमा तोड़ी या कहीं तट बंध को प्रेम संग लापरवाही ने
आहत बरसों की नेह हो गई
ऐसा क्या हो गया एक ही क्षण में झुलस गया सब कुछ

कौन हो गया उच्छश्रृंखल
किसे चढ़ गया मद बिन पिय
एक अनदेखा परिवर्तन घर करने लगा है
उदारता और सहनशीलता संग सहिष्णुता ने भष्मासुर को जन्म दे दिया है

आहत किसने किसे किया
पहल किसने की, दोषी कौन,
आहत यदि अपनी ईहलीला समाप्त कर लेता तो
या ग्लानिवश उसने नाती को गोली मार दी होती तो

साम, दाम,दण्ड और भेद नीति ज़रूरी नहीं क्रमशः आयें

शायद कुछ पलों पहले भी यही हुआ
किसी संत से प्रश्न किया गया
प्रत्युत्तर में एक चांटा जैसा लगा

किसने हमें अधिकार दे दिया अनर्गल प्रश्न करने का

किसी और ने प्रश्न नहीं किया क्या
उन्हें चांटा क्यों नहीं लगा

संत से उलटे सीधे प्रश्न ही क्यों किया जाये
मर्यादा तोड़ें और दोष अन्य पर मढ़ा जाये न्यायसंगत

पत्रकारिता अपनी सीमा के पार जाती
तब ही तो टी वी पत्रकार पहली बार हँसता हुआ दिखा

ये तमाचा एक सीमा को निर्धारित करेगा?
जो तुम्हे काँटा बोये उसके लिये तुम फूल बिछा दो?

26 मार्च 2003
समर्पित नई पीढ़ी को