गुरुकुल ५

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Sunday, 2 September 2012

सपने

युवराज सिंह
सुबह की किरणों ने आँगन को
उजाले से भर दिया
लेकिन
रात को चूल्हा नहीं जल पाया
सोमवार को लकड़ी गीली थी
मंगलवार को मिशराइन ने
चावल नहीं दिये थे

बेटा बुधवार को रामबाई चाची संग
आटा पिसवाने गई थी
तू तो जानता है,
गुरुवार लक्ष्मी का वार है

पिछले इतवार हमने क्या खाया था?
चल चूल्हा जलाते हैं
इस शुक्रवार नहीं करेंगे
संतोषी माता का व्रत

और सुन मेरे राजा लल्ला
हम नहीं जायेंगे
प्रसाद खाने नहर किनारे
शनि मंदिर, आज शनिवार है

शानू ने अपनी माँ के गले में
बड़े प्यार से बाहें डाली
और धीरे से कहा
कोई बात नहीं

चलो सो जाते है
सपने में राहुल की माँ आयेगी
मालपुआ लायेगी
दोनों खायेंगे?

तुम काम पर चले जाना
मैं स्कूल चला जाऊंगा
दिन तो रोज ही आते हैं
ऐसे सपने कहाँ आते हैं ?

02.09.2012

29 comments:

  1. हाहाकारी समझदारी.

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  2. मार्मिक ... समय से पहले बड़ा होना .... जीवन की विवशता ...

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  3. सपने सच होते सदा ,देखे इसे जरूर
    एक दिन पूरे होयगें,लगन रखे भरपूर,,,,

    RECENT POST,परिकल्पना सम्मान समारोह की झलकियाँ,

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  4. मार्मिक भाव... सच है ऐसे सपने कहाँ आते हैं ?
    भूख बिन धुंआ बिन राख के जलने वाली भयानक आग... सटीक अभिव्यक्ति के लिए आभार

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  5. आह..
    मन दुखी हुआ पढकर....

    सादर
    अनु

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  6. छलना भरे विश्‍व में केवल सपने ही तो सच होते हैं.

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  7. काहा काहा से खोज लाते है ऐसे भाव, सुन्दर कविता

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  8. भाव प्रवण कविता। मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है।

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  9. इस छोर से उस छोर तक,कहने के लिए कुछ नही बचा...|

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  10. ख़्वाबों में भूख मिटे तो भी क्या गम है पर भूखे पेट ख़्वाब भी कब तक साथ देंगे? ironic.

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  11. ख़्वाबों में भूख मिटे तो भी क्या गम है पर भूखे पेट ख़्वाब भी कब तक साथ देंगे?

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  12. भूख में भी जो कविता ढूँढ ले उसे ही ऐसे सपने आते हैं..

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  13. सपने कब हुए अपने?फिर भी सहारा तो हैं.
    दिल छू लेने वाली कविता.

    चि.युवराज को स्नेह और आशीष.

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  14. अत्यंत सुंदर और सरल सहज शब्दों में पिरोई मासूम इच्छा ,सरल शब्दों का आनंद कुछ और ही है अपने लिखकर एक संतोष और पूर्णता का अनुभव किया होगा ऐसा मेरा विश्वास है,अनेक बधाइयाँ

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  15. सपने सच होते सदा ,देखे इसे जरूर
    एक दिन पूरे होयगें,लगन रखे भरपूर
    बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको
    और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

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  21. दिल को छू गयी आपकी यह कविता।
    मास्टर युवराज सिंह से मिल कर अच्छा लगा। वे खूब तरक्की करें यही शुभकामना है।


    सादर

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  22. बहुत मर्मस्पर्शी प्रस्तुति...

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  23. हम सपने देखते हुए जीवन जीते रहते हैं, बाक़ी सब ईश्वर के सहारे छोड़ देते हैं।

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  24. वाह सर वाह........ बहुत सुंदर काव्य... बहुत मार्मिक भाव .........

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  25. ... युवराज सिंह से मिल कर अच्छा लगा !!

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  26. बहुत सुन्दर .....|मैंने आपका ब्लॉग देखा अच्छा लगा..कभी समय मिले तो http://pankajkrsah.blogspot.com पर पधारने का कष्ट करें आपका स्वागत है ...सादर

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