गुरुकुल ५

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Tuesday, 26 November 2013

परेशाँ क्यूँ है?

रमाकांत सिंह 

*
आसमां बादलों से परेशाँ क्यूँ है?
घर लोगों से बेवज़ह हैरां क्यूँ है?
ज़िन्दगी खुश है तेरे जानिब यूँ?
फिर ये चेहरा हंसीन वीराँ क्यूँ है?

**
रोशन है ये जहाँ दिल अन्धेरा क्यूँ है?
शोर दीवाली का फिर ये मायूसी क्यूँ है?
लोग खुश महफ़िल में आँखें नम क्यूँ है
जलजला आँखों में यूँ दिल बंज़र क्यूँ है

***
देख मुश्किलों में इन्सां मुस्कुराता क्यूँ है?
तैरकर दरिया में आज मन प्यासा क्यूँ है?
हर हंसीं चहरे पे हंसी है फिर मातम क्यूँ है?
राह अपनी आसां मंज़िल आज कांटे क्यूँ हैं

24  नवम्बर 2013
समर्पित मेरी ज़िन्दगी को
     

16 comments:

  1. सवालों में उलझी ज़िन्दगी! यही यथार्थ है.

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  2. अगर इन सवालों के जवाब मिल पाते....तो नए सवाल खड़े हो जाते .....यह क्रम यूहीं ही अनवरत चलेगा ....और अपने सवालों का जवाब .हमें कभी नहीं मिलेगा

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  3. नहीं सरल हर एक भाव का रेखाञ्कन हो जाये । रेखाओं के चक्रव्यूह बिन चित्राञ्कन हो जाये । जीवन केवल घोर तपस्या कलाकार की है । नहीं जरूरी बीच तपस्या मूल्याञ्कन हो जाये ।

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बुधवार को (27-11-2013) तिनके तिनके नीड़, चीर दे कई कलेजे :चर्चा मंच 1443 में "मयंक का कोना" पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. आपके द्वारा आज बुधवार को (27-11-2013) तिनके तिनके नीड़, चीर दे कई कलेजे :चर्चा मंच 1443 में "मयंक का कोना" पर **परेशाँ क्यूँ है?** को स्थान देने के लिए ह्रदय से आभार

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  5. यही तो जीवन है .... शुभकामनायें आपको !

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  6. न सवालों के जवाब मिल पाते...न जीवन ... चलता है यू ही जीवन...

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  7. न सवालों के जवाब मिल पाते...न जीवन ... चलता है यू ही जीवन...

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  8. क्यूँ है ? यह यक्ष प्रश्न ...शायद इसका कोई उत्तर नहीं है ...हर इंसान के सामने है !
    (नवम्बर 18 से नागपुर प्रवास में था , अत: ब्लॉग पर पहुँच नहीं पाया ! कोशिश करूँगा अब अधिक से अधिक ब्लॉग पर पहुंचूं और काव्य-सुधा का पान करूँ | )
    नई पोस्ट तुम

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  9. Jeevan anek virodhabhason se buna huaa ek nakadjaal hai.. Aise kitne hi sawal ham khud se nahin poochhate haun, sochte han koi baahar se aayega inka uttar lekar.. Aapne is rachna ke maadhyam se mujhe yah vicharne ka awasar diya, aabhari hoon!

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    1. आपके विचारो के लिये हृदय से आभार
      यह विचार जिन्दगी से साझा किया गया है और आपके स्नेह से सदैव मार्ग प्रशस्त हुआ,

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  10. बेहतरीन पंक्तियाँ ...ऐसे कितने ही प्रश्न हम सबके जीवन से जुड़े हैं .....

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  11. इन सवालों के मध्‍य कुछ नये सवाल फिर से जन्‍म ले रहे हैं ....
    ये सवाल खत्‍म होते हैं न इनके जवाब
    बेहतरीन प्रस्‍तुति

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  12. इन्हीं विरोधाभासों में ही तो ज़िंदगी का ताना-बाना बुना है ऊपरवाले ने...बस! ऐसे ही उलझना है..सुलझना है ...

    ~सादर

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  13. प्रिय ब्लागर
    आपको जानकर अति हर्ष होगा कि एक नये ब्लाग संकलक / रीडर का शुभारंभ किया गया है और उसमें आपका ब्लाग भी शामिल किया गया है । कृपया एक बार जांच लें कि आपका ब्लाग सही श्रेणी में है अथवा नही और यदि आपके एक से ज्यादा ब्लाग हैं तो अन्य ब्लाग्स के बारे में वेबसाइट पर जाकर सूचना दे सकते हैं

    welcome to Hindi blog reader

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  14. बेहतरीन पंक्तियाँ ...

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