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सादगी अच्छी है
विचार ऊँचे हैं
स्वागत करते हैं
बशर्ते
इस पर कोई हँसे नहीं
वरना ये सादगी बदल जाती है
छिछोरेपन में
तुम मानो न मानो
लोग ऐसा ही कहते हैं
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बंद कर मुट्ठी
चले आये यहां
बंद कर मुट्ठी
कल चले जाओगे
खोलकर मुट्ठी
गर बैठे उम्र भर
सोचो
तन्हा बैठोगे?
तन्हा चले जाओगे?
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कैसा मातम
कैसी तन्हाई
तेरे जाने पर
कैसी ख़ुशी
ऐसा आलम
तेरे आने पर
ये मैं जानूं
या तू जाने
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तुझसे मिलना भी
कसकता है
बिछड़ना होगा
फिर भी
इंतजार रहता है
मैं तेरा इंतजार करता हूँ
मैं तेरा इंतजार करता हूँ
चित्र गूगल से साभार
तथागत ब्लॉग के सर्जक
श्री राजेश कुमार सिंह को समर्पित
