तू नहीं तेरी यादें नहीं
तो दिवाली कैसी?
तू नहीं तेरा चेहरा नहीं
तो फिर दिवाली मेरी?
तू है?
तेरी तन्हाइयों संग
ये दिवाली?
दिवाली मेरी?
लम्हा-लम्हा
गुजर गई ज़िन्दगी
सोचता हूँ तेरे बिन
कटेगी ये ज़िन्दगी?
रोशनी में कटती नहीं
अंधेरों में क्या खाक जी पाऊंगा
मेरी ज़िन्दगी को समर्पित
12नवम्बर 2012
चित्र गूगल से साभार
