गुरुकुल ५

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Friday, 1 February 2013

विक्रम वेताल 9



विक्रम ने हठ न छोड़ा
वेताल को कंधे पर लाद चल पड़ा
वेताल ने कहा
राजन तुम्हारा श्रम हरने के लिए
तुम्हे आज कल की कहानी सुनाता हूँ

उत्तर न देने पर तुम्हारा सिर
टुकड़े टुकड़े हो जायेगा

चार अंधों ने हाथी का स्वरुप बतलाया
जिन्हें क्रमशः पैर, पेट, कान, और पूंछ मिला

क्रमशः अनुभव आये

हाथी खम्भे जैसा है
यह तो सन्दूक समान है
नहीं यह सूप सदृश्य है
अरे छोडो
हाथी रस्सी जैसा है

अँधा भी प्रत्यक्ष दर्शी हो सकता है?
कौन है संजय?
जो धृतराष्ट्र को आँखों देखा हाल बतायेगा?
जो सच हो सच के सिवाय झूठ नहीं?

राजन
दिल्ली के शाम के चलन में
अकारन मारी गई दामिनी
अकलतरा के हवा में सिमट गई दिल्ली?
किसने किसे समेट लिया अपने आँचल में?

राजन दिग्भ्रमित मत होना
ज़रा बतलाओ दोषी कौन?

लड़की?
लड़का?
माँ?
बाप?
भाई, बहन, संगी, सहेली?
किसी के कह देने से पुलिस?
प्रशासन?
संस्कार?
या स्वछन्द विचार?
वा स्वेच्छाचारिता?

नाम और दाम की चाह?
या ये सब एक संग?

निष्पक्ष जांच हो?
बलात्कारी को फांसी की सजा हो?
किन्तु साक्ष्य सच्चे हों
जांच कर्ता निर्मल हो


राजन
हो गए न हाथ पैर सुन्न?
एक गलत फैसले पर
कितने गलत रास्ते खुलेंगे

सूक्ष्म, गहन, अवलोकन, परिक्षण
निरीक्षण, लड़की की भी हो?
कहीं ऐसा तो नहीं?
आज का सच्चा हमदर्द ही दोषी?

कहीं कोई हमें धोखा तो नहीं दे रहा है?
अपना बनकर
यदि देश भक्त पुलिस शक के दायरे में?
तो पक्ष और प्रति पक्ष क्यों नहीं?

किसी की निष्ठा पर प्रश्न चिन्ह?
और किसकी निष्ठा पर?

01.02.2013
चित्र गूगल से साभार
   

Sunday, 27 January 2013

विक्रम वेताल 8

चित्र बी. बी. सी. हिंदी समाचार से साभार


वेताल ने राजा विक्रम से कहा
राजन मैं आश्चर्य चकित हूँ

आपके न्याय से 

पूरी दुनिया कहती है 
मृत्यु दण्ड?
आपने कहा 
मृत्यु तक दण्ड?

अपराध अक्षम्य?
स्वीकारोक्ति?
साक्ष्य गढ़ दिए गये?
अथवा साक्ष्य स्वयं सिद्ध?

घटना महानगर की
वा किसी कस्बे की
पूरा देश एक ही रंग में रंगा?
बलात्कार बलात्कार 

राजन कहीं ऐसा तो नहीं?
साक्ष्य गढ़ दिये जाते हैं?
साक्ष्य मिटा दिये जाते हैं?
रक्षक ही भक्षक?

वेताल ने कहा
राजन धन्य है तुम्हारी दूर दृष्टि

मृत्यु दण्ड में जीवन कहाँ?
और मृत्यु तक दण्ड में जीवन?
जीवन मूल्यों की रक्षा के लिए 
जीवन या मृत्यु?

एक घटना दिल्ली में घटित
एक घटना अकलतरा में
कल किसी और जगह 
बेटी मेरी या बेटा तुम्हारा?

न्याय 
सर्वकालिक?
सर्वमान्य?
सार्वभौमिक?

तब मृत्यु तक दण्ड क्यों?
मृत्यु दण्ड क्यों नहीं?
राजन तुम्हारी मति मारी गई है?
या चलन बढ़ गया झूठ का?

या नाम और दाम की चाह?
चलो देख लो एक बार?
क्या जाने कितने लोग फसेंगे?
न जाने किसके सिर तोहमत होगी?

28. 01. 2013
चित्र बी. बी. सी. हिंदी समाचार से साभार
      
  

Saturday, 22 December 2012

विक्रम वेताल 7

यत्र नार्यस्त पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः?

राजन क्या आप ही
न्याय प्रिय विक्रमादित्य हो?
न्याय और विद्वान के संरक्षक?
तब आज जिह्वा पर ताला क्यों?

क्या बलात्कारी आपका पुत्र?
या आपका हितैषी?
राजदार जो संकट मोचक?
या जोरू का भाई?

क्या उसे कल भारत रत्न देना है?
या किसी महापुरूष की संतान?
है कोई  युग पुरुष?
जिसे फांसी  दे देने से

मानवता कलंकित हो जाएगी?

लोग सड़क पर उतरें?
एवज में बेटी के बलात्कार के?
क्यों कोई मुह ताके न्याय के?
न्याय बिन गुहार के मिले?

उम्र कैद उचित?
या तथाकथित अंग भंग?
या मानवाधिकार का सहारा लें?
बचा डालें अपनी बहन सौपने कल?

गैंग रेप कोई महान कृत्य?
जिस पर बहस ज़रूरी?

फांसी के अतिरिक्त कोई अन्य सजा कारगर?
संविधान में संशोधन ज़रूरी?

राजन
भोथरी हो गई तुम्हारी तलवार?
आज कोई गड़रिया चढ़ेगा टीला पर?
राजा भोज खोजेगा सिहासन बत्तीसी?

शायद त्वरित उचित न्याय ही रोके
जन आक्रोश और बलात्कार

21.12.2012
यह रचना *** अस्किनी *** संग 
हर बेटी, बहन, माँ, को समर्पित
चित्र गूगल से साभार