झूठ आदर्श का पूरक है?
और आदर्श झूठ का संपूरक है?
झूठ ही आदर्श को स्थापित कर देता है?
आदर्श झूठ की जननी है?
जो सच है वह आदर्श है?
जो आदर्श है उसका कहीं भी अस्तित्व है?
जो है नहीं वही आदर्श
मृगमरीचिका की भांति?
बियावान ज़िन्दगी
सरपट
किन्तु कंटीली राहें
बेमौसम बरसात
झुलसता दिन
सर्द रात
खाली पेट
खुले हाथ
झूठ पर टिका सच
चंदामामा आयेगा
मालपुआ पकायेगा
हम सब खायेंगे?
हर रोज?
बिना नागा?
२५.०८.2०००
चित्र गूगल से साभार
