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| कुछ विचार आपसे साझा करने के लिए |
1 नक़ल करना और नक़ल लिखना एक कला है
2 शुद्ध वाचन से आत्म ज्ञान बढ़ता है
3 शुद्ध लेखन मष्तिष्क से ध्वनि का समन्वय स्थापित करता है
4 वाद विवाद आत्म अभिव्यक्ति का सहज सरल माध्यम है
5 गायन से आत्मा का सम्बन्ध परमात्मा से जुड़ता है
6 चित्र कला अंतर अभिव्यक्ति का मौन किन्तु सशक्त माध्यम है
7 गृह कार्य अपने ही कार्य के मूल्यांकन का श्रेष्ठ उपाय है
8 गणवेश हमारे व्यक्तित्व को चार चाँद लगाता है
9 शालेय या व्यक्तिगत स्वच्छता हमारा व्यक्तित्व मापक यंत्र है
10 बागवानी हमें प्रकृति के निकट लाती है
11 केश विन्यास हमारा स्वरुप निर्धारित करती है
12 खेलकूद हमारे आत्मा और चरित्र का निर्माण करती है
13 अभिनय के माध्यम से हम अंतर आत्मा में झांकते हैं
14 नाटक हमें सामाजिक परिवेश से जोड़ता है
15 नृत्य हमारा आत्मिक संतुलन दृढ करता है
16 वृक्षारोपण हमें पैतृक ऋण से मुक्ति दिलाते हैं
17 पेड़ों को पानी डालकर हम अपनी परम्परा को जीवित रखते हैं
18 स्वयं के प्रति सम्मान हमारे स्वाभिमान की रक्षा करता है
19 शिक्षक को प्रणाम कर स्व को जागृत करते हैं
20 शिक्षा ग्रहण कर माँ बाप के ऋण से मुक्त होते हैं
21 वार्षिक सम्मलेन हमारे समग्र चरित्र का प्रदर्शन करता है
22 राष्ट्रिय पर्वों को मनाकर हम अपनी अस्मिता की रक्षा का संकल्प लेते हैं
23 महापुरूषों की जयंती हमारा मार्गदर्शन करती हैं
24 रंगोली हमारे जीवन में नित नये रंग भरती है
25 तैरने से हमारी कल्पनाशीलता को नया आयाम मिलता है
26 प्रति पल प्रयास हमें अभिष्ट लक्ष्य के निकट लाती है
27 अनुशासन विद्यार्थी और विद्या का मूल आधार है
28 आज्ञाकारी शिष्य ही सम्मान का पात्र होता है
29 परीक्षा लक्ष्य को निर्धारित करने वाले कार्य का मूल्यांकन करते हैं
30 साहित्य का सर्जन समाज की दशा और दिशा का लेखा जोखा है
31 सांस्कृतिक कार्यक्रम हमारे संस्कृति का संवर्धन करते हैं
06. 07. 1992
चित्र गूगल से साभार

